Independence Day

72th India Independence Day (15 August) Speech In Hindi, English, Tamil, Telugu, Marathi For Teachers, Students, Kids

Swami Vivekananda: One of India’s Greatest Spiritual Gurus | Hindi

स्वामी विवेकानंद को आप संकल्प शक्ति, विचारों की ऊर्जा, अध्यात्म और आत्मविश्वास का एक पावर हाउस कह सकते हैं उनसे सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को ऊर्जा मिलती है आज 4 जुलाई है और आज ही के दिन 116 वर्ष पहले स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हुई थी आज ही वो तारीख है जब स्वामी विवेकानंद महा समाधि में लीन हो गए थे वैसे महापुरुषों की कभी मृत्यु नहीं होती क्योंकि उनके विचार कभी नहीं मरते, उनके विचार हमेशा जीवित रहते हैं जिस दौर में स्वामी विवेकानंद अपने जीवन के शिखर पर थे उस दौर में भारत अंग्रेजों का गुलाम था गुलाम भारत की युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए स्वामी विवेकानंद ने कहा था “उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए, तुम जो सोच रहे हो उसे अपनी जिंदगी का विचार बना उसके बारे में सोचो उसके लिए सपने देखो उस विचार के साथ  जियोजो तुम्हारे दिमाग में, तुम्हारी मांसपेशियों में तुम्हारी नसों में और तुम्हारे शरीर के हर हिस्से में वह विचारधारा होना चाहिए यही सफलता का सूत्र है। सभी शक्तियां तुम्हारे अंदर है, तुम कुछ भी कर सकते हो और सब कुछ कर सकते हो इस बात पर विश्वास करो भरोसा करो कि तुम कमजोर नहीं हो। अगर तुम्हारे दिमाग और तुम्हारे दिल के बीच संघर्ष चल रहा हो तो तुम्हें वही करना चाहिए जो तुम्हारा दिल कहता है।” यह स्वामी विवेकानंद के विचार हैं जिन्होंने भारत के युवाओं के मन में स्वाभिमान और स्वतंत्रता के बीज बोए।

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स्वामी विवेकानंद ने भारत के लोगों को भारत से प्यार करना सिखाया, महात्मा गांधी ने स्वामी विवेकानंद के साहित्य को पढ़ने के बाद उनके बारे में लिखा था कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों को गहराई से समझा और उनके विचारों की गहराई में उतरने के बाद, देश के प्रति उनका प्रेम 1000 गुना बढ़ गया। बड़े-बड़े शहरों में एयर कंडीशन में बैठकर, फास्ट फूड खाते हुए कॉफी पीते हुए महंगी गाड़ियों में घूमते हुए और आलीशान मॉल में शॉपिंग करते हुए आप कभी उस दौर की कल्पना भी नहीं कर सकते, जब भारत में हमारे ही पूर्वज अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों से  कुचले जा रहे थे। देश सिर्फ विदेशी ताकतों से दुखी नहीं था बल्कि देश के लोग बहुत सारी सामाजिक बुराइयों के भी गुलाम थे। हमारे देश में छुआछूत फैली हुई थी, लोग जाति और धर्म के नाम पर लड़ते थे। महिलाओं की स्थिति बहुत बुरी थी भारत का पूरा समाज बिखरा हुआ था। ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद ने भारत के युवाओं में आत्मविश्वास भरा। जरा विचार कीजिए अगर आज से 30 वर्ष पहले भारत को सपेरों और जादूगरों का देश कहते थे। भारत के लोगों का कोई सम्मान नहीं था उस दौर में भी अगर स्वामी विवेकानंद पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकते हैं तो आज के दौर में भारत के लोग ऐसा क्यों नहीं कर सकते। हम तो कहेंगे आज के दौर में भारत के लोग क्या नहीं कर सकते। आज भारत एक विकासशील देश है, दुनिया की बहुत बड़ी शक्ति है भारत विकास और तरक्की के एक ऐसे मोड़ पर है जिसे स्वामी विवेकानंद के विचारों वाले पावर हाउस की बहुत सख्त जरूरत है। आप इसको विवेकानंद एनर्जी भी कह सकते हैं आज युवा पीढ़ी को इनोवेशन और नए विचारों की जरूरत है। बेरोजगारी आज भी देश की सबसे प्रमुख समस्याओं में से एक है।

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Swami Vivekananda Speech

देश की युवा पीढ़ी को विवेकानंद के विचारों से आज भी बहुत मदद मिल सकती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था “take risk in your life if you win you can lead if you lose you can guide” अर्थात:- अपने जीवन में जोखिम उठाओ अगर तुम जीतोगे तो नेतृत्व करोगे और अगर हारोगे तो लोगों का मार्गदर्शन करोगे। सांप्रदायिक तनाव और जातिगत भेदभाव आज भारत  की एक बहुत बड़ी समस्या है अगर भारत का हर नागरिक स्वामी विवेकानंद के विचारों से सीख लें तो यह समस्या भी खत्म हो सकती है। स्वामी विवेकानंद ने अपने बारे में कहा था, अगर मैं अपने अनगिनत दोस के बावजूद खुद से प्यार करता हूं तो मैं कुछ दोस की वजह से किसी दूसरे से नफरत कैसे कर सकता हूं। भारत विश्वगुरु हुआ करता था और आज कुछ ढोंगी बाबाओं की वजह से भारत बदनाम हो रहा है। भारत में आज एक आध्यात्मिक भ्रष्टाचार फैला हुआ है इस समस्या का इलाज भी स्वामी विवेकानंद ने बहुत पहले ही बता दिया था, स्वामी विवेकानंद ने कहा था कोई भी आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता आपकी सबसे बड़ी शिक्षक आपकी अपनी अंतरात्मा है। यह स्वामी विवेकानंद के विचार हैं जो आज भी बहुत प्रासंगिक हैं। स्वामी विवेकानंद के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है कि उन्होंने दुनिया को भारत की शक्ति का एहसास करवाया। भारत की शक्ति से दुनिया का परिचय करवाया आज से 600 वर्ष पहले अमीर खुसरो नामक फारसी विद्वान ने भारत की प्रशंसा करते हुए लिखा था कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरी दुनिया के लोग शिक्षा के लिए भारत आते हैं, भारत का कोई व्यक्ति शिक्षा लेने के लिए कभी विदेश नहीं जाता। लेकिन उस के विपरीत आज देखिए आज के हालात बिल्कुल उलटे है, भारत बहुत कम लोग आते हैं शिक्षा लेने के लिए लेकिन भारत के लोग विदेश जा रहे हैं शिक्षा लेने के लिए।

1893 अमेरिका के शिकागो विश्व धर्म संसद का आयोजन हुआ तब स्वामी विवेकानंद ने ओजस्वी भाषण दिया था, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। भाषण की शुरुआत में उन्होंने कहा था सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका अमेरिकी भाइयों और बहनों और आपको जानकर बहुत अच्छा लगेगा उनके इन शब्दों को सुनकर वहां मौजूद लोगों ने करीब 2 मिनट तक स्वामी विवेकानंद के लिए खड़े होकर तालियां बजाई थी और उनका अभिवादन किया था। 1893 में कई सदियों के बाद दुनिया ने भारत का विश्वरूप देखा था। इस ऐतिहासिक भाषण के बारे में आपने जरूर पढ़ा और सुना होगा लेकिन इस भाषण के बाद पूरी दुनिया में किस तरह की प्रतिक्रिया हुई थी और तब अमेरिका के अखबारों में क्या छपा था आज आप सबको जरूर जानना चाहिए। राजगोपाल चट्टोपाध्याय के किताब स्वामी विवेकानंद इन इंडिया करेक्टिव बायोग्राफी के पेज नंबर 150 पर अमेरिका के अखबार न्यू यॉर्क सिटी की एक टिप्पणी करने स्वामी विवेकानंद के बारे में लिखा था, कई लोगों ने बहुत अच्छा भाषण दिया लेकिन एक हिंदू साधू ने विश्व धर्म संसद के विषय को जिस तरह लोगों के सामने रखा वैसा कोई और नहीं रख सकता है, वह उनका पूरा भाषण छाप रहा है लेकिन वहां मौजूद लोगों पर उनके भाषण का जो प्रभाव पड़ा उसे बयान कर पाना बहुत मुश्किल है, उनका तेजस्वी चेहरा उनकी बुद्धिमता और उनकी वेशभूषा के प्रभाव को बताने के लिए शब्द कम पड़ रहे हैं। ऐसा ही लिखा था एक और एक एक और अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क हेराल्ड ने “इसमें कोई शक नहीं है कि विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद सबसे महान वक्ता थे उन्हें सुनने के बाद यह लगता है कि इतने विद्वान और बुद्धिमान देश में मिशनरीज को भेजना कितना मूर्खतापूर्ण है।

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