Independence Day

72th India Independence Day (15 August) Speech In Hindi, English, Tamil, Telugu, Marathi For Teachers, Students, Kids

महात्मा गाँधी पर भाषण | राष्ट्रपिता Mahatma Gandhi Speech Hindi

महात्मा गांधी जी अहिंसा के परिचय थे उनके जीवन में ऐसे कई कार्य हैं जिससे हम सभी को शिक्षा मिलती है। आज 15 अगस्त के उपलक्ष में उनके जीवन का सूक्ष्म परिचय भाषण के रूप में आपके सामने हमारे पोस्ट द्वारा प्रस्तुत है।

जीवन परिचय – महात्मा गांधी का जीवन परिचय कुछ इस प्रकार से है। गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी, माता का नाम पुतलीबाई और इनके पिता करमचंद गांधी थे। इनकी पत्नी का नाम कस्तूरबा गांधी और उनके बच्चों का नाम हरिलाल, मणिलाल, रामदास और देवदास था।

मुख्य आंदोलन – इनके मुख्य आंदोलन दक्षिण अफ्रीका में आंदोलन, असहयोग आंदोलन, स्वराज नमक सत्याग्रह, हरिजन आंदोलन, निश्चय दिवस और भारत छोड़ो आंदोलन है।

प्रसिद्ध वाक्य – मोहन दास करमचंद गांधी या महात्मा गांधी कहते हैं अहिंसा परमो धर्म। महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता की उपाधि दी गई इसलिए उन्हें प्यार से बापू कहकर पुकारा जाता है। देश को गुलामी की जंजीरों से बाहर निकालने में गांधीजी का योगदान अनोखा है। अहिंसा परमो धर्म के सिद्धांत पर चलकर इन्होंने देश को एकजुट कर के आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने की प्रेरणा दी। गांधी जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने देश की जनता को विश्वास दिलाया ki स्वतंत्रता की लड़ाई सब की लड़ाई है, छोटा सा योगदान भी देश की आजादी के लिए अहम हिस्सा है। इस तरह से देश की जनता ने स्वतंत्रता की लड़ाई को अपनी लड़ाई बनाया और एकजुट होकर 200 वर्षों की गुलामी की बेड़ियों को तोड़ दिया।

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Mahatma gandhi speech for independence day

Speech on Mahatma Gandhi

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गांधीजी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। हम सभी गांधीजी के सिद्धांतों से परिचित है और आदर के भाव से उन्हें याद करते है इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस को अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाई जाती है। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के बल पर देश को आजादी दिलाई यह सोचकर ही सवालों की झड़ी लग जाती है की कैसे संभव हुआ होगा सत्य, अहिंसा के बल पर अंग्रेजों को बाहर करना। यह संभव किया गया था मोहनदास करमचंद गांधी के द्वारा जिसके लिए उन्होंने कई सत्याग्रह आंदोलन किए जिसमें देश वासियों ने उनका साथ दिया। इनके कहने मात्र से देशवासी एकजुट हो जाते थे जेल जाने को तत्पर रहते थे। उन्होंने कहा था ताकत दो प्रकार की होती है जो किसी को सजा के डर के रूप में मिलती है, और दूसरी जो प्यार दे कर मिलती है। प्यार से मिली ताकत हजार गुना ज्यादा होती है, डराकर मिली ताकत की तुलना में।

महात्मा गांधी जीवन से जुड़ी अहम बातें

गांधी जी एक साधारण व्यक्ति थे। उसी तरह उनके जीवन के भी सामान्य लक्ष्य थे। पढ़ना एवं कमाना जिसके लिए उन्होंने इंग्लैंड विश्वविद्यालय से बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की। डिग्री लेने के बाद वह स्वदेश आकर आजीविका के लिए जुट गए लेकिन मन मुताबिक कुछ नहीं कर पाए, आखिरकार उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में नौकरी के लिए जाना स्वीकार किया। यह काल 1893 से 1914 तक था कहां जा सकता है कि इसी काल में गांधी जी को एक साधारण व्यक्ति से स्वतंत्रता सेनानी बनने की तरफ प्रेरित हुए। उन दिनों दक्षिण अफ्रीकी में काले गोरे का भेद चरम सीमा पर था जिस का शिकार गांधी जी को भी बनना पड़ा, एक घटना जिसे हम सब ने सुना है उन दिनों गांधीजी के पास फर्स्ट क्लास का टिकट होते हुए भी उन्हें थर्ड क्लास में जाने को कहा गया जिसे उन्होंने नहीं माना और इसके कारण उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था। उन्हें जीवन व्यापन करना पड़ा यहां तक कि न्याय की उम्मीद में जब न्यायपालिका से गुहार की गई तब भी उन्हें अपमानित किया गया इस सभी गतिविधियों के कारण गांधी जी के मन में कहीं ना कहीं स्वदेश की परतंत्रता का विचार तेजी पर था। उन्हें महसूस हो रहा था कि देश के लोग किस तरह से अधीन होकर अपने आप को नित्य प्रतिदिन अपमानित होता देख रहे हैं। शायद इसी जीवन काल के कारण गांधी जी ने स्वदेश की तरफ रुख लिया और देश की आजादी में अपने आप को समर्पित कर दिया। प्रदेश लौटकर गांधी जी ने सबसे पहले किसान भाइयों को एक कर लुटेरे जमींदारों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। वह जमीदार भी अंग्रेजों के हुकुम के अधीन थे राजकोष के लिए दो से तीन गुना कर वसूला जाने लगा। इस तरह गरीबों को जानवरों की जिंदगी से आजाद करने के लिए 1918 में गांधी जी ने गुजरात के चंपारण और खेड़ा नामक स्थान पर लोगों का नेतृत्व किया। सबसे पहले उनके जीवन को एक सही दिशा में ले जाने के लिए उन्हें स्वच्छता का पाठ सिखाया इस रैली का नेतृत्व लौह पुरुष वल्लभ भाई पटेल ने किया और परिणाम स्वरुप गांधी जी को रिहाई मिली। यह बड़ी जीत साबित हुई, लोगों में जागरूकता आने लगी और यहीं से देशव्यापी एकता की शुरुआत हो गई और इसी समय इन्हें बापू कहकर पुकारा जाने लगा। आज श्री नरेंद्र मोदी जी देश को स्वच्छ बनाने के लिए गांधीजी के उसी मार्ग को अपनाकर सभी देशवासियों को जागरुक कर रहे हैं।

Mahatma Gandhi Speech

13 अप्रैल 1919 में पंजाब के अमृतसर में एक महासभा में अंग्रेजों द्वारा नरसंघार किया गया था। जलियांवाला बाग चारों तरफ से लंबी दीवारों से बना हुआ था और केवल एक छोटा सा रास्ता था इसी का फायदा उठाकर अंग्रेज जनरल डायर ने 90 सिपाहियों के साथ बिना ऐलान की गोलीबारी शुरू कर दी। लगभग 3000 लोग मारे गए कुछ गोलियों से छल्ली हुए तो कई भगदड़ में दब गए और कई डर के कारण बाग में बने कुएं में कूद गए। जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद गांधीजी ने देशव्यापी स्तर पर असहयोग आंदोलन किया। यह 1 अगस्त 1920 को शुरू किया था इस आंदोलन में पहली बार सीधे शासन के विरुद्ध आवाज उठाई गई। आंदोलन शुरु किया गया दांडी यात्रा निकालकर नमक कानून तोड़ा एवं अपना सहयोग अंग्रेजों के सामने प्रकट किया। इस तरह देश के हर कोने में लोगों ने गांधी जी को फॉलो करना शुरू किया और पूरा देश स्वतंत्रता की इस लड़ाई का हिस्सा बनने लगा। इन सबके बीच कई बार गांधी जी को जेल भी जाना पड़ा कई स्वतंत्रता सेनानियों ने गांधीजी के अहिंसा के पथ को नकार भी दिया। इस तरह नरम दल एवं गरम दल का निर्माण हुआ। गांधी जी को कई कटुता भरे आरोपों का भी वहां सामना करना पड़ा। फिर भी उनका कहना था तुम मुझे बांध सकते हो, तुम मुझे यातनाएं दे सकती हो, तुम इस शरीर को खत्म भी कर सकते हो पर तुम मेरे दिमाग को बांध नहीं सकते।

Long and Short Speech on Gandhi ji

द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान देश में भारत छोड़ो आंदोलन शुरु किया गया 9 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन का ऐलान किया गया। यह एक ऐसा समय था जब ब्रिटिश हुकूमत युद्ध में फंसी हुई थी, दूसरी तरफ देश की जनता जाग उठी थी। नरम दल एवं गरम दल दोनों ही अपने जोरों पर देश में आंदोलन को चला रहे थे। सभी नेता सक्रिय थे सुभाष चंद्र बोस ने भी अपनी आजाद हिंद फौज के साथ दिल्ली चलो का ऐलान कर दिया था। इस प्रकार पूरे देश में खलबली के बीच भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई जिसके बाद गांधीजी को गिरफ्तार किया गया लेकिन देश में आंदोलन अपनी तेजी से बढ़ रहा था। फिर उन्होंने कहा “किसी एक गलती को बहुत सहारा मिल जाए तो वह सच नहीं बन सकती और ना ही सच गलत हो सकता है भले वह दिखाई ना दे सच हमेशा खड़ा होता है। भले ही उसे किसी भीड़ का सहारा ना मिले क्योंकि सत्य आत्मनिर्भर होता है।” 1942 के बीच देश की स्थिति में बड़े बदलाव आए अंग्रेजी हुकूमत हिलने लगी, देश को एकजुट रखना भी मुश्किल था। जहां एक तरफ देश आजाद होने की तरफ बढ़ रहा था वहीं दूसरी तरफ हिंदू मुस्लिम लड़ाई ने अपने पैर इस कदर फैला लिए थे कि अंग्रेजी हुकूमत ने देश को दो हिस्सों में बांटने का ऐलान कर दिया। 14 अगस्त की मध्यरात्रि को पाकिस्तान का जन्म हुआ और 15 अगस्त को भारत को आजादी मिली। उनका कहना बहुत सही था आपको इंसानियत पर से विश्वास नहीं खोना चाहिए। इंसानियत एक सागर की तरह है अगर कुछ बूंदें सागर में मैली हो तो सागर गंदा नहीं हो सकता। आज कई बातों के लिए गांधीजी को जिम्मेदार कहा जाता है शायद उसी कारण 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा में नाथूराम गोडसे ने गांधी जी को गोली मारकर आत्मसमर्पण किया। पाकिस्तान के जन्म के लिए देश के लोगों ने आक्रोश था क्योंकि इससे देश पृथक नहीं हुआ था। अपितु देश के भीतर हिंदू मुस्लिम लड़ाई ने अधिक उग्र रूप ले लिया था, जिसका परिणाम हम सभी आज तक भोग रहे हैं। गांधी जी के जीवन में इतनी सारी बातें हैं जिन्हें मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती लेकिन कुछ बातें आपके सामने रखी हैं। आपको हमारा पोस्ट कैसा लगा आप हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।

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