Independence Day

72th India Independence Day (15 August) Speech In Hindi, English, Tamil, Telugu, Marathi For Teachers, Students, Kids

Real vs Fake भारत को आजादी किसने दिलाई ? Gandhi Ji, Netaji Bose or Hitler

दोस्तों आज हमारा 72वा स्वतंत्रता दिवस है। आज ही के दिन हमारा देश आजाद हुआ था, तो पहले तो मैं आप सभी को इस महान दिन की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां देता हूं। और इस  पोस्ट में  हम बात करेंगे कि हमें आजादी असल में दिलाई किसने।

क्या मोहनदास करमचंद गांधी जिनको हम महात्मा गांधी जी बोलते हैं क्या इन्होंने आजादी दिलाई?

जरा कुछ तथ्यों पर गौर कीजिए गांधीजी कांग्रेस पार्टी के नेता थे और यह कांग्रेस पार्टी को अंग्रेजों ने बनाया था तो क्या अंग्रेज ऐसी पार्टी को खुद बनाएंगे जो उन को भारत से बाहर निकाले। तो साधारण सा कॉमन सेंस भी यही कहेगा कि नहीं बनाएंगे, लेकिन एक ऐसी पार्टी बनी जिसको अंग्रेजों ने बनाया है जिसमें पढ़े-लिखे भारतीयों को लाया गया और उन्होंने आजादी के आंदोलन को एक नया एंगल दे दिया। उन्होंने अहिंसा वाले तरीके वाला एंगल दे दिया जो कि दुनिया में कहीं कभी काम नहीं किया और हमारे देश में भी नहीं किया। तो अब प्रश्न उठता है  कि क्या गांधी जी ने हमें आजादी दिलाई? तो इसका उत्तर है आजादी इन्होंने बिल्कुल भी नहीं दिलाई।

Role of Mahatma Gandhi in Independence of India

अब हम गांधी जी और ब्रिटिश सरकार के कुछ खास संबंधों पर देखते हैं तो  यह प्रश्न उठता है कि क्या गांधी जी पर कभी लाठीचार्ज हुआ? तो जवाब है नहीं क्या गांधी जी को कभी काला पानी में रखा गया? नहीं! क्या उनको कभी जेल में यातनाएं दी गई, टॉर्चर किया गया हो तो ऐसा भी कभी नहीं हुआ। जबकि आप सब जानते हैं कि अंग्रेजों ने कितना ज्यादा अत्याचार किया है दूसरे लोगों पर जो देश की  आजादी के लिए लड़ रहे थे। यहां तक कि अहिंसा से देश की आजादी की आवाज बुलंद करने वाले लाला लाजपत राय को भी जेल में बहुत लाठियों से मारा गया बहुत यातनाएं दी गई लेकिन गांधी जी और नेहरू इन जैसों को कभी हाथ भी नहीं लगाया गया। कुछ भी नहीं किया गया कभी जेल में रखा भी तो बिल्कुल VIP की तरह रखा गया है तो दो-तीन दिन के लिए और बाद में हटा दिया। क्यों ऐसा किया गया? अगर गाँधीजी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहे थे तो फिर अंग्रेजों ने उन पर इतनी कृपा क्यों किया?

गांधी जी पर 4 बार हमले भी हुए थे और उन चारों में से तीन हमलों में अंग्रेजों ने ही उन्हें बचाया था और साथ में सुरक्षा  भी दी थी। तो अंग्रेज ऐसा क्यों करेंगे जब गांधी जी उन्हीं के खिलाफ लड़ रहे थे और उन्हें सिक्योरिटी क्यों देंगे? गांधी जी पर हमला तब हुआ था जब अंग्रेज देश से जा चुके थे और वह हमला नाथूराम गोडसे ने किया था।

Don’t Forget to Read:- August 15 Narendra Modi Independence Day Speech

जितने भी आंदोलन गांधी जी ने स्टार्ट किए वह सारे बीच में बंद कर दिए बिना किसी ठोस कारण के चाहे वह असहयोग आंदोलन हो, स्वदेशी आंदोलन हो। अगर वह वाकई अंग्रेजो के खिलाफ थे तो उन्होंने क्यों सारे आंदोलन बीच में रोक दिए। क्यों किसी को भी आगे नहीं बढ़ने दिया और क्यों अंग्रेजों ने उनको बार-बार  बचाया है। अंग्रेज हुकूमत ने कईयों को मौत की सजा और आजीवन कारावास दिया गांधीजी एक वकील भी थे लेकिन उन्होंने कभी किसी स्वतंत्रता सेनानी का केस नहीं लड़ा और उनके पास किसी के लिए भी अगर दया याचिका आई तो उन्होंने किसी का भी साथ नहीं दिया। भगत सिंह, सुखदेव राजगुरु इन जैसों की फांसी की सजा को आजीवन कारावास में बदलने के लिए जो याचिका गई थी उस पर गांधी जी ने हस्ताक्षर नहीं किए उन्होंने उसका समर्थन नहीं किया। भले ही वह अहिंसा की बात करते हो लेकिन जब उन्हें पता चला कि सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज देश पर हमला करने वाली है तो उन्होंने  कहां की अगर हमला हुआ तो मैं खुद उस फौज के खिलाफ लड़ने जाऊंगा तलवार लेकर। तो ऐसा उन्होंने क्यों कहा था और जब विश्व युद्ध शुरू हुआ तो गांधीजी ने भारत के लोगों को अंग्रेजों का साथ देने के लिए बोला और यहां तक की उन्होंने अंग्रेजों की सेनाओं के लिए भारतीयों की भर्ती करने का भी काम किया।

उन्होंने भारत के लोगों को बोला कि आप अंग्रेजों के लिए लड़ो उनकी सेना में भर्ती हो। क्या ऐसा आदमी अंग्रेजों के लिए खतरा हो सकता है? जरा सोचिए। उसी दौरान जलियांवाला बाग जैसी घटना सामने आती है जहां सैकड़ों हजारों लोगों को  अंग्रेजो के द्वारा गोलियों से भून दिया जाता है और गांधीजी वहां पर भी कुछ कुछ नहीं करते, बस अहिंसा को अपनाने की सलाह देते। जो अंग्रेज मासूम लोगों को गोलियों से मारते हो, तो क्या ऐसे अंग्रेज धरने प्रदर्शन या अनशन जैसी चीजों से डरेंगे? वह देश छोड़कर भागेंगे? क्या दुनिया के किसी भी कोने में कभी भी इस तरह के धरने प्रदर्शन से कभी कोई नतीजा मिला है? कहीं नहीं मिला। आजादी के लिए खून पसीना बहाना पड़ता है। यह भूख हड़ताल, अनशन, धरना प्रदर्शन से कहीं कुछ नहीं होता।  ना हमारे देश में हुआ है और ना कहीं हुआ। हाल के दिनों में अन्ना हजारे ने भी इसी तरह का आंदोलन किया था जिसका परिणाम कुछ नहीं हुआ जबकि उनको इतना सारा साथ मिला, कोई अत्याचार नहीं, कोई गोली बंदूक नहीं फिर भी कुछ हाथ नहीं लगा। गांधी जी ने कुछ नहीं किया तो फिर किसने किया उस पर भी आते हैं ज़रा आप देश के आजाद होने के बाद कुछ अंग्रेजो के बयान को पढ़िए जो उन्होंने पत्रकारों के साथ कहे। कुछ किताबों को पढ़िए जो इस विषय पर लिखी गई थी। क्लेमेंट एटली जोकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे उन्होंने बताया था कि गांधीजी हमारे लिए कोई खतरा नहीं थे, बल्कि वह हमारे साथी थे ऐसा उन्होंने बोला था।

Also Read :- Independence Day Shayari in Hindi

Contribution of Subhash Chandra Bose to India’s freedom struggle

गांधी जी ने आजादी नहीं दिलाई तो क्या भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, खुदीराम बोस, चंद्रशेखर आजाद, सावरकर इन जैसे क्रांतिकारियों ने दिलवाई थी? तो इसका जवाब भी ना है इन्होंने बिल्कुल बहुत संघर्ष किया बहुत लड़ाइयां लड़ी, देश के लिए जिसके लिए हम सब को उनका सम्मान करना चाहिए। हम सब उनके आभारी हैं पर असल में इन्होंने भी अंग्रेजों को कोई ऐसा नुकसान नहीं किया जिसके कारण उन्हें भारी नुकसान हो और वह देश छोड़कर जाए। अगर इकलौता कोई आदमी है जिसने अंग्रेजों को वाकई नुकसान पहुंचाया तो वह है सिर्फ और सिर्फ सुभाष चंद्र बोस इन्होंने अंग्रेजों को भारी नुकसान  पहुंचाया। उन्होंने आजाद हिंद फौज बनाई जिसके 26000 फौजी देश के लिए शहीद हुए 26000 कोई कम संख्या नहीं होती, इतने सारे लोग अपने देश के लिए लड़े और देश के लिए शहीद हुए। अंग्रेज हुकूमत से लड़े और इन्होंने अंग्रेजों की सेनाओं को भयंकर तरीके से कमजोर कर दिया था। 30 से 35 हजार से ज्यादा अंग्रेज हुकूमत के सैनिकों को इन्होंने मारा था। अंग्रेजों को किसी से डर लगता था तो वह सिर्फ आजाद हिंद फौज थी, अंग्रेजों को गांधी जी से डर नहीं लगता था, उनको भगत सिंह, राजगुरु से भी डर नहीं लगता था। उनको सिर्फ भारत के शेर सुभाष चंद्र बोस से डर लगता था। सुभाष चंद्र बोस के अलावा भी एक और व्यक्ति है जिसने देश को आजादी दिलाने में सबसे बड़ा योगदान दिया तो इस चित्र में आप देख रहे हैं सुभाष चंद्र बोस को और दूसरा वह हाथ मिला रहे हैं हिटलर जर्मनी के एडोल्फ हिटलर से। यही एडोल्फ हिटलर है जिन्होंने देश को आजादी दिलाई, अब यह बात आपको बड़ी अजीब सी लग रही होगी लेकिन यह सच है। आगे  के तथ्यों पर आते हैं तो हिटलर की सच्चाई में वह शख्स हैं जिन्होंने हमारे देश को आजादी दिलाई। ना सिर्फ हमारे देश को बल्कि कई और देश भी हैं जिन्हें आजादी हिटलर के कारण मिली।

Adolf Hitler nad Azad Hind Fauj Contribution to India’s Independence

दूसरे विश्व युद्ध में फ्रांस और ब्रिटेन पर  हिटलर ने जर्मनी से जबरदस्त हमला किया ऐसा जबरदस्त हमला किया की पूरी की पूरी ब्रिटिश और  उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह कर डाला। उनकी पूरी सेनाओं को तबाह कर डाला, युद्ध में हार के बाद ब्रिटेन और  फ्रांस दोनों ही देशों की आर्थिक स्थिति भी बहुत खराब हो गई थी। यह दोनों देश अब किसी भी देश में अपने सेनाओं को  रखने और शासन करने के हालात में नहीं थे। इतना भारी नुकसान आर्थिक तौर पर ब्रिटेन को कमजोर कर दिया था और इसके बाद आजाद हिंद फौज भी संगठित हो चुकी थी दूसरे हमले के लिए तो अंग्रेजों का जाना ही था। 

अंग्रेजों ने  सोचा कि खुद ही चले  जाने में ज्यादा अच्छा है क्योंकि अगर वह खुद जाएंगे तो किसी ऐसों को सत्ता सौंप के जाएंगे जो  उनके लिए भविष्य में खतरा ना हो, लेकिन अगर हम सुभाष चंद्र बोस की सेनाओं के हमले के बाद जाते हैं तो सत्ता सुभाष चंद्र बोस के पास होगी।  और सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में भारत बहुत ज्यादा तरक्की करेगी और ब्रिटेन पर हमला करने का भी प्रयास किया जा सकता है। इसीलिए अंग्रेजो ने सोचा कि गांधी, नेहरू जैसे लोगों को सत्ता सौंपी जाए तो अच्छा रहेगा। ना सिर्फ भारत को बल्कि कई और देशों को अंग्रेजों ने और फ्रांस सरकार ने आजाद कर दिया एक ही साथ जो कि उनकी गुलामी में थे जैसे श्रीलंका, मलेशिया, जॉर्डन, बर्मा, कंबोडिया, वियतनाम और भारत। इनमें से कई देशों में कोई स्वतंत्रता के लिए आंदोलन नहीं चल रहा था जैसे श्रीलंका, मलेशिया  जहां कोई भी आंदोलन नहीं चल रहा था, फिर भी यह सारे देश आजाद कर गए क्योंकि युद्ध के बाद ब्रिटेन इस पोजीशन में नहीं था कि वह किसी और देश को गुलाम बना सके।

तो ब्रिटेन की आर्थिक हालात खराब करने में और उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद करने में सबसे बड़ा हाथ एडोल्फ हिटलर का था जिनकी वजह से हमें आजादी मिली। उसके बाद  नाम आता है सुभाषचंद्र बोस का। अगर किसी को राष्ट्रपिता आपको बोलना चाहिए तो वह सुभाष चंद्र बोस है। वैसे राष्ट्रपिता जैसा शब्द सही नहीं होता कोई राष्ट्र का कोई पिता नहीं होता।

जिन लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से लड़ाई लड़ी उनका  आजादी में कोई योगदान नहीं रहा है उन्होंने सिर्फ भारत की आजादी को  और विलंब करने का काम किया है। जितने लोग गांधी जी के साथ थे अगर उसके आधे के आधे भी अगर भगत सिंह जैसों के साथ होते तो हम कब के आजाद हो चुके थे। हमारी आबादी थी उस समय 50 करोड़ और सिर्फ 10  हजार अंग्रेज हम 50 करोड़ पर राज कर रहे थे, अगर कुछ लाख भी खड़े हो जाते हथियार उठा कर तो क्या वह अंग्रेजों को नहीं भगा पाते? बिल्कुल भगा पातें। पर वह काम नहीं हो रहा था क्योंकि गांधी जी ने हमें अहिंसा वाला तरीका बताया था उन्होंने बताया था कि बिना लड़े मरे भी आपको आजादी मिल जाएगी। ऐसा कह कर उन्होंने लोगों को बरगला दिया था और जिसका नतीजा यह था कि आजादी हमारी  देर होती गई। आपने मेरा यह पोस्ट पढ़ा इसके लिए बहुत-बहुत शुक्रिया, कृपया नीचे कमेंट में बताएं आपको कैसा लगा भारत की सच्चाई जानकर। जिनको मेरी इस पोस्ट से बुरा लगा हो उनसे मैं माफी मांगता हूं, और आप सभी ने मेरी इस पोस्ट पर अपना बहुमूल्य समय दिया उसके लिए धन्यवाद जय हिंद वंदे मातरम |

If You Like This Article Plzz Share it on Facebook, Whatsapp, twitter or Google+




Updated: August 7, 2018 — 12:37 am

2 Comments

Add a Comment
  1. Thank you sir this topic is very important for the new generation

  2. I always feel the same when i go through books and now your post make my vision clear. Thnx.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Independence Day © 2018